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माली जाति की उत्पत्ति एवं विकास माली समाज की उत्पत्ति के बारे में यूं तो कभी एक राय नहीं निकली फिर भी विभिन्न ग्रंथो अथवा लेखा - जोगा रखने वाले राव , भाट , जग्गा , बडवा , कवी भट्ट , ब्रम्ह भट्ट व कंजर आदि से प्राप्त जानकारी के अनुसार तमाम माली बन्धु भगवान् शंकर माँ पार्वती के मानस पुत्र है ! एक कथा के अनुसार दुनिया की उत्पत्ति के समय ही एक बार माँ पार्वती ने भगवान् शंकर से एक सुन्दर बाग़ बनाने की हट कर ली तब अनंत चौदस के दिन भगवान् शंकर ने अपने शरीर के मेल से पुतला बनाकर उसमे प्राण फूंके ! यही माली समाज का आदि पुरुष मनन्दा कहलाया ! इसी तरह माँ पार्वती ने एक सुन्दर कन्या को रूप प्रदान किया जो आदि कन्या सेजा कहलायी ! तत्पश्चात इन्हें स्वर्ण और रजत से निर्मित औजार कस्सी , कुदाली आदि देकर एक सुन्दर बाग़ के निर्माण का कार्य सोंपा! मनन्दा और सेजा ने दिन रात मेहनत कर निश्चित समय में एक खुबसूरत बाग़ बना दिया जो भगवान् शंकर और पार्वती की कल्पना ...
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समाज सेवी स्व. श्री जगदीश सिंह परिहार एक नजर में जीवन परिचय · जन्म : 21 अगस्त , 1935 जोधपुर · पिता : स्व. सेठ श्री भीकम दास परिहार · माता : स्व. श्रीमती छीनिया देवी · पत्नी : श्रीमती शांति देवी · पुत्र : चंद्रशेखर , सुनील · पुत्री : प्रेरणा · शिक्षा : स्नातक ( कॉमर्स ) महाराज कुमार कॉलेज से व्यापारिक क्षेत्र : · मै. रामबगस भीकमदास परिहार में अनाज , गुड़ , शक्कर का थोक व्यापार किया । · ऊन मील एवं ग्वार - गम उद्योग हेतु देशी विदेशी संस्थाओं से संपर्क किया । · ...